Hindi Literature
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                                    गोपाल सिंह नेपाली

१. हिमालय ने पुकारा

चालीस करोड़ों को हिमालय ने पुकारा

होजाय पराधिन नहीं गंग की धारा

गंगा के किनारों को शिवालय ने पुकारा

हम भाई समझते जिसे दुनियां में उलझ के

वह घेर रहा आज हमें वैरी समझ के

चोरी भी करे और करे बात गरज के

बर्फों मे पिघलने को चला लाल सितारा

चालीस करोड़ों को हिमालय ने पुकारा

२. प्रार्थना बनी रही

रोटियां गरीब की प्रार्थना बनी रही

एक ही तो प्रश्न है रोटियों की पीर का

पर उसे भी आसरा आंसुऒं के नीर का

राज है गरीब का ताज दानवीर का

तख्त भी पलट गया कामना गई नहीं

रोटियां गरीब की प्रार्थना बनी रही

चूम कर जिन्हें सदा क्रांतियां गुजर गई

गोद में लिये जिन्हें आंधिया बिखर कई

पूछता गरीब वह रोटियां किधर गई

देश भी तो बंट गया वेदना बंटी नहीं

रोटियां गरीब की प्रार्थना बनी रही

३ गरीब का सलाम ले

कर्णधार तू बना तो हाथ में लगाम ले

क्रांति को सफल बना नसीब का न नाम ले

भेद सर उठा रहा मनुष्य को मिटा रहा

गिर रहा समाज आज बाजुओं में थाम ले

त्याग का न दाम ले

दे बदल नसीब तो गरीब का सलाम ले

यह स्वतन्त्रता नहीं कि एक तो अमीर हो

दूसरा मनुष्य तो रहे मगर फकीर हो

न्याय हो तो आरपार एक ही लकीर हो

वर्ग की तनातनी न मानती है चांदनी

चांदनी लिये चला तो घूम हर मुकाम ले

त्याग का न दाम ले

दे बदल नसीब तो गरीब का सलाम ले

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